जैश-ए-मोहम्मद की गुप्त फंडरेजिंग का खुलासा, पाकिस्तान में 313 नए आतंकी ठिकानों की साजिश

नई दिल्ली

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ने पाकिस्तान में अपनी गतिविधियों को फैलाने के लिए गुप्त रूप से एक बड़े फंडरेजिंग अभियान की साजिश रची थी. खुफिया सूत्रों के अनुसार, संगठन का मकसद पीकेआर 3.91 अरब रुपये जुटाकर पाकिस्तान भर में 313 नए मार्कज (ट्रेनिंग कैंप और सुरक्षित ठिकाने) स्थापित करना था.

जैश सरगना मौलाना मसूद अजहर और उसके भाई तल्हा अल सैफ ने अभियान का नेतृत्व किया और समर्थकों से बढ़-चढ़कर दान करने की अपील की. इसके लिए डिजिटल वॉलेट्स जैसे ईज़ीपैसा और सदापे का इस्तेमाल किया गया, ताकि लेन-देन को FATF (Financial Action Task Force) की निगरानी से बचाया जा सके.

ये भी पढ़ें :  Cyclone Biparjoy : बिपरजॉय के टकराने से पहले ही गुजरात का हाल-बेहाल, तेज बारिश शुरू, बाढ़ आने का बढ़ा खतरा

जांच में सामने आया कि ये डिजिटल वॉलेट्स मसूद अजहर के परिवार से जुड़े मोबाइल नंबरों पर रजिस्टर्ड थे, जिनमें उसके भाई तल्हा अल सैफ और बेटे अब्दुल्ला अजहर के नंबर भी शामिल थे. इसके अलावा, हर शुक्रवार पाकिस्तान की मस्जिदों में गाजा के लिए चंदा बताकर नकद धन जुटाया गया, जबकि असल में ये रकम जैश की आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हुई.

इसी दौरान अल रहमत ट्रस्ट, जो जैश से जुड़ा हुआ संगठन है, बहावलपुर स्थित एक बैंक खाते के जरिए भी धन इकट्ठा कर रहा था. यह ट्रस्ट खुद मसूद अजहर और उसके नजदीकी सहयोगी चलाते हैं.

ये भी पढ़ें :  इस गर्मी आसमान से बरसेगी आग! हीटवेव को लेकर IMD का बड़ा अपडेट

फंडरेजिंग अभियान के आगे बढ़ते ही जैश नेताओं ने खुलासा किया कि नए बनाए जा रहे मार्कज मसूद अजहर और उसके परिवार के लिए सुरक्षित ठिकाने साबित होंगे, जिससे वे अपनी मौजूदगी छिपाकर रख सकें. इन्हीं ठिकानों का इस्तेमाल नए आतंकियों की भर्ती और प्रशिक्षण के लिए भी किया जाना था.

सूत्रों के मुताबिक, यह फंडरेजिंग अभियान पूरी तरह सफल रहा और जैश ने पाकिस्तान और विदेशों से भारी मात्रा में धन इकट्ठा कर लिया. इस रकम से संगठन ने मशीन गन, रॉकेट लॉन्चर और मोर्टार जैसी आधुनिक हथियार खरीद लिए.

ये भी पढ़ें :  'मेरी सेहली' महिला यात्रियों के लिए मददगार बनी, अबतक 38 हजार से ज्यादा महिलाओं ने लिया हिस्सा

अब अपने नए हथियारों और विस्तारित ढांचे के साथ जैश-ए-मोहम्मद एक नई आतंकी लहर छेड़ने की तैयारी में है. संगठन के नेताओं को भरोसा है कि उनकी परिष्कृत फंडिंग व्यवस्था और गुप्त कम्युनिकेशन चैनल्स की वजह से उनकी गतिविधियां लंबे समय तक नजरों से बची रहेंगी.

Share

क्लिक करके इन्हें भी पढ़ें

Leave a Comment